झूठी है आज़ादी, झूठा यह जश्न है
सत्ता है मनुवादी, वही पुराना रस्म है !!
कही बलात्कार कही अत्याचार
कही हो रहे दंगे
भूखा इंसान, दुखी किसान
गरीबों के बच्चे नंगे !
हर भेड़ीया नोचता यहाँ,भारत माता का जिस्म है
सत्ता है मनुवादी, वही पुराना रस्म है !!
दलित नक्सली, मुस्लिम आतंकी
हिंदू हो गया दाता
कटता इंसान, रोती संतान
सुरक्षित सिर्फ़ गो माता !
दलित मुस्लिमपर हुकुमत करना,गोधारी तिलिस्म है
सत्ता है मनुवादी, वही पुराना रस्म है !!
ना मिले रोटी, ना सलामत बेटी
भांडवलशाही राज है
गरीब कमाये और अमीर खाये
जो कल था वही आज है !
मजदूरों के कमाईपर,हररोज इनका जश्न है
सत्ता है मनुवादी, वही पुराना रस्म है !!
धर्मों का आटा, जहरीला साठा
पिसे पिस न जाय
छोड़ो धर्म जाती,धरो इंसानियत नाती
कौन यहाँ कहलाए !
जाती जाती का झगड़ा यहाँ,एकता यहाँ विघ्न हैं
सत्ता हैं मनुवादी, वही पुराना रस्म हैं !!
संजय बनसोडे
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